कोलकाता: इंडियन प्लास्टिक्स फेडरेशन (आईपीएफ) की 67वीं वार्षिक आम बैठक में प्लास्टिक उद्योग के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा की गई। बैठक में उद्योग के बड़े एमएसएमई आधार को बनाए रखने और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार से तत्काल नीतिगत सहयोग देने की मांग की गई।
बैठक में इंडियन प्लास्टिक्स फेडरेशन के अध्यक्ष अमित कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष श्याम लाल अग्रवाल, मानद सचिव सौरभ गरोड़िया, मानद कोषाध्यक्ष रजत रतेरिया और मानद संयुक्त सचिव सुदर्शन कुमार तावरी सहित फेडरेशन के सदस्य और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आईपीएफ के अध्यक्ष अमित कुमार अग्रवाल ने कहा, “प्लास्टिक आज लगभग हर उद्योग के लिए जरूरी है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और कच्चे तेल तथा पॉलिमर की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। प्लास्टिक प्रसंस्करण से जुड़ी अधिकांश इकाइयां एमएसएमई क्षेत्र में आती हैं और अब बढ़ती कच्चे माल की लागत को अकेले वहन करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।”
उन्होंने सरकार से आयात शुल्क में उचित बदलाव, देश में पॉलिमर की स्थिर उपलब्धता और छोटी इकाइयों के लिए सहायता जैसे कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक का इस्तेमाल पैकेजिंग, औद्योगिक उपकरणों और रोजमर्रा के उत्पादों सहित लगभग हर क्षेत्र में होता है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने का असर कई उद्योगों पर पड़ेगा और अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ता पर भी आ सकता है।
अग्रवाल ने कहा कि आईपीएफ प्लास्टिक कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के क्षेत्र में सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा, “प्लास्टिक समस्या नहीं है, समस्या है उसका गलत तरीके से इस्तेमाल और निपटान।”
फेडरेशन ने ‘प्लास्टिक को जानें’ अभियान के माध्यम से प्लास्टिक के उचित उपयोग, निपटान, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को प्लास्टिक के उपयोग और जिम्मेदार निपटान की जानकारी देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
आईपीएफ ने सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर टिकाऊ और जिम्मेदार प्लास्टिक व्यवस्था विकसित करने तथा उद्योग की आर्थिक मजबूती बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
Breakingnewszone Guddu
Mob :- 9830082220
Post a Comment